
प्रिंटिंग की ज़्यादातर समस्याएँ प्रिंटिंग मशीन पर पैदा नहीं होतीं। वे छपाई से पहले - फ़ाइल में - पैदा होती हैं। इसी चरण को प्रीप्रेस कहते हैं, और यही तय करता है कि जॉब पहली बार में सही छपेगा या कागज़, प्लेट और समय बर्बाद होगा।
प्रीप्रेस का मतलब क्या है?
डिज़ाइन मिलने से लेकर प्रिंटिंग मशीन शुरू होने तक के सारे कदम प्रीप्रेस में आते हैं। प्रीप्रेस टीम फ़ाइल जाँचती है, चुने गए प्रोसेस के लिए उसे तैयार करती है और प्लेट या डिजिटल आउटपुट बनाती है।
प्रीप्रेस के मुख्य स्टेप
1. फ़ाइल लेना और जाँचना (प्रीफ़्लाइट)
फ़ाइल का साइज़, फ़ॉन्ट, इमेज रेज़ोल्यूशन, कलर मोड, ब्लीड और छूटे हुए हिस्से जाँचे जाते हैं। कुछ भी आगे बढ़ने से पहले समस्याएँ ठीक की जाती हैं या ग्राहक को बताई जाती हैं।
2. कलर मोड और कलर मैनेजमेंट
स्क्रीन RGB में रंग दिखाती है, लेकिन प्रिंटिंग मशीन CMYK स्याही (सियान, मजेंटा, येलो और ब्लैक) से छापती है, कभी-कभी Pantone जैसे अतिरिक्त स्पॉट कलर के साथ। प्रीप्रेस रंगों को बदलकर और एडजस्ट करके यह पक्का करता है कि छपाई उम्मीद के मुताबिक़ हो।
3. रेज़ोल्यूशन
छपाई के लिए इमेज आमतौर पर फ़ाइनल साइज़ पर लगभग 300 dpi रखी जाती है। कम रेज़ोल्यूशन वाली इमेज फ़ोन पर साफ़ दिखती है, लेकिन धुंधली छपती है।
4. ब्लीड और सेफ़ एरिया
जो डिज़ाइन किनारे तक जाता है उसे कटिंग लाइन से कुछ मिलीमीटर आगे तक बढ़ाया जाता है (ब्लीड), ताकि कटने के बाद सफ़ेद किनारा न दिखे। ज़रूरी टेक्स्ट सेफ़ मार्जिन के अंदर रहता है।
5. ट्रैपिंग और ओवरप्रिंट
रंगों के बीच बहुत छोटा ओवरलैप (ट्रैपिंग) रखा जाता है ताकि मशीन पर शीट थोड़ी हिलने पर भी सफ़ेद गैप न दिखे। काला टेक्स्ट आमतौर पर ओवरप्रिंट पर रखा जाता है।
6. इम्पोज़िशन
पेज या लेबल को प्रिंटिंग शीट पर सही क्रम और दिशा में जमाया जाता है ताकि शीट का पूरा उपयोग हो और फ़ोल्डिंग या कटिंग सही हो। पैकेजिंग में आर्टवर्क को डाईलाइन - यानी बॉक्स के कटिंग और फ़ोल्डिंग लेआउट - पर रखा जाता है।
7. प्रूफ़िंग
ग्राहक को मंज़ूरी के लिए प्रूफ़ - डिजिटल या फ़िज़िकल - भेजा जाता है। मंज़ूर किया हुआ प्रूफ़ प्रिंटर और ग्राहक दोनों की सुरक्षा करता है।
8. प्लेट मेकिंग (CTP)
ऑफ़सेट के लिए फ़ाइनल फ़ाइल CTP (कंप्यूटर-टू-प्लेट) मशीन से प्लेट पर उतारी जाती है। फ्लेक्सो में फ़ोटोपॉलिमर प्लेट लगती है। डिजिटल प्रिंटिंग में प्लेट की ज़रूरत ही नहीं होती - देखें ऑफ़सेट, फ्लेक्सो और डिजिटल प्रिंटिंग में अंतर।
प्रीप्रेस की आम गलतियाँ
- CMYK छपाई के लिए RGB इमेज भेज देना
- ब्लीड न होना या टेक्स्ट का किनारे के बहुत पास होना
- कम रेज़ोल्यूशन वाले लोगो और फ़ोटो
- फ़ॉन्ट छूट जाना या गलत फ़ाइल वर्ज़न
- बिना प्रूफ़िंग के स्पेलिंग की गलतियाँ मंज़ूर हो जाना
प्रीप्रेस करियर के लिए ज़रूरी स्किल
प्रीप्रेस प्रोफ़ेशनल को डिज़ाइन सॉफ़्टवेयर, बारीकी पर ध्यान, रंग की जानकारी और प्रेस व फ़िनिशिंग के काम की समझ चाहिए। कंप्यूटर और डिज़ाइन पसंद करने वाले छात्रों के लिए यह अच्छा करियर है - पढ़ें हमारी प्रिंटिंग करियर गाइड।
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